HomeIndian AirforceINS विक्रांत के लिए नेवी ने माँगा Rafale M चीन नहीं बचेगा

INS विक्रांत के लिए नेवी ने माँगा Rafale M चीन नहीं बचेगा

दोस्तों जैसा की हम सभी को पता है की अभी कुछ दिन पेहले ही स्वदेशी विमान वाहक युद्धपोत, यानी INS विक्रांत एयरक्राफ्ट कार्रिएर के सभी बेसिन ट्रायल्स, कोचीन शिपयार्ड में किये गये, जिसके बाद INS विक्रांत अब सी ट्रायल्स के लिए गहरे समंदर में जाने के लिए तैयार है, जहा इसीकी सभी क्षमताओं जी जाच होगी, 6 महीनो के इन डीप सी ट्रायल्स में INS विक्रांत अगर सफल रहा, तो अगले साल पुरे रीती रिवाज के साथ देश में बने पेहले एयरक्राफ्ट कार्रिएर को नेवी शामिल कर दिया जायेगा, लेकिन सिर्फ एयरक्राफ्ट कार्रिएर शामिल करने से नेवी समुद्री सरहदों की रक्षा नहीं कर सकती, तो इस जंगी जहाज पर ऐसे नेवल एसेट्स भी होने चाहिये, जो वक्त आने पर दुश्मन पर कहेर बरपा सके, जी हा दोस्तों यहाँ में बात कर रहा हु नेवल फाइटर जेट्स की

दरअसल INS विक्रांत के बन जाने के बाद से ही ये अटकले लगनी शुरू हो चुकी है, की आगामी एयरक्राफ्ट कार्रिएर के लिए नेवी किन विमानों का चयन करेगी, हम सब जानते है की चीनी नौसेना की बढती पॉवर को देखते हुए, फिलहाल के लिए तो नेवी को 57 नेवल फाइटर जेट्स की सक्त जरुरत है, और अगर रशियन मिग २९ विमान की बात करे, तो वे अपनी ज्यादातर सेवा नेवी को चुके है, वक्त के साथ पुराने हो रहे इन रुसी विमानों को ऑपरेट करना खतरे से खाली नहीं, इसीलिए नेवी इन्हें 2030 से पेहले रिटायर्ड करने की सोच रही है, लेकिन सवाल ये है की अगर इन्हें रिटायर्ड किया गया, तो INS विक्रांत या विक्रमादित्य से ऑपरेट क्या करेंगे, Multi Role Carrier-Borne Fighter Aircraft के लिए जो टेंडर हुआ, वो अभी भी प्रोसेस में ही, और ना जाने और कितनी देर तक ये प्रोसेस में ही रहेगा, और अगर ये किसी कंपनी को मिलता भी है, फिर भी उससे फाइटर जेट्स भारत आने में 3 साल का वक्त तो लगेगा ही लगेगा,

क्योकि इस टेंडर में प्राइस नेगोशिएशन, वेपन पैकेज, सर्विस और बहोत सारी बातों टन पे चर्चा होगी, और ये बाते अगर हमारे मंत्रालय के मनमुताबिक रही, तो ही ये डील आगे जाकर फाइनलायिज होगी, और इसमें बहोत सारे वक्त जाया होगा, TEDBF की बात करे, तो ऑफ़ कोर्स इससे बेहरतीन फाइटर जेट नेवी को मिल नहीं सकता, क्योकि इसे लगभग पाचवे पीढी के विमानों की तर्ज पर बनाया जा रहा है, पर दिक्कत ये है की इसकी पेहली फ्लाइट टेस्ट 2026 में रखी गयी, और अगले 2 साल तो इसके टेस्टिंग में ही चले जायेंगे, तो हम मानके चलते है की इसकी मैन्युफैक्चरिंग भी AMCA के साथ ही होगी, जिसका मतलब यही ये ही ये विमान भी 2030 के पेहले नेवी को मिलना मुक्शील होगा, ऐसे में सिर्फ एक ही जेट रेह जाता है जो की है राफेल मरीन, जी हा दोस्तों राफेल का नेवल वरियेंट राफेल मरीन काफी बेहतरीन फाइटर जेट है, में यहाँ राफेल की बात इसीलिए कर रहा हु, क्योकि फ़्रांस ही है जो हमें कम समय में नेवी की Requirements के मुताबिक फाइटर जेट्स मुहय्या करा सका सकता है, फ़्रांस भारत के लिए पेहली ही राफेल जेट्स बना रहा है, तो लाजमी है उसे नेवी के राफेल बनाने में पेहले से कम समय लगेगा, साथ ही इस बार फ़्रांस इन विमानों की किमत भी कम करने को राजी है, और सबसे खास, खुद नेवी इन विमानों को INS विक्रांत के लिए चाहती है, वैसे भी नेवी के पास सिर्फ 40 मिग 29 जेट्स बचे है, और इतने कम फाइटर जेट्स लेकर चीन का मुकाबल नहीं किया जा सकता, तो ऐसे में आप बताईये, क्या हमें TEDBF बनने तक रुकना चाहिए, या फिर थोड़े बहोत राफेल मरीन भी खरीदने चाहिए,

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