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सरकार के सामने बढी N-POWERED CARRIER की अमंग BABA के इंजिनियर्स ने दिखाया दम

दोस्तों एक बहोत ही बड़ा अपडेट किसी भी नौसेना का तैरता आइलैंड का एयरक्राफ्ट कार्रिएर को लेकर सुनने को मिल रहा है, जी हा दोस्तों ये तो हम सभी को पता है की बडा एयरक्राफ्ट कार्रिएर किसी भी नेवी की बेक बोर्न मानी जाती है, जिसकी बदौलत वो दुश्मन देशों को अपने सामने झुकने को तक मजबूर कर देती है, और इसीका तजा उदहारण US नेवी के अलावा कोई भी हो भी नहीं सकता, आपको बता दे की अमरीकी नौसेना के पास फिलाहल ११ नुक्लेअर पॉवेरेड कार्रिएर्स है, जिसमे से हर एक कार्रिएर 80 एयरक्राफ्ट अपने साथ ले जा सकते है, इसीलिए तो चीन के पास दुनिया की सबसे बडी नेवी होने के बावजूद वो US नेवी के सामने कुछ नहीं, यही नहीं तो इन्ही जंगी जहाजो के बदौलत आज अमेरिका पूरी दुनिया में बेखौफ होकर राज कर रहा है, तो आप सांझ सकते है न्यूक सबमरीन के साथ साथ नुक्लेअर एयरक्राफ्ट कार्रिएर भी नेवी के लिए कितने जरुरी होते है, और यही कारन है की चीन भी बडी तादात में इन कार्रिएर्स का निर्माण कर रहा है.

बात करे भारतीय नौसेना की तो कोचीन शिपयार्ड के सभी इंजीनियर और जहाज डिजाइनर भारतीय नौसेना के लिए बनाये गए पहले स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत यानी INS विक्रांत को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं, विक्रांत अपना पेहला ट्रायल पूरी सफलता के साथ पूरा चूका है, जबकि इसके 5 और डीप सी ट्रायल्स होने बाकी है, जो की इसी साल पुरे होंगे, लेकिन इसी बिच एक बडी मांग सरकार से होने लगी, दरअसल दोस्तों ये तो सभी को पता है, की भारत अब नुक्लेअर मिसाइल से लेकर नुक्लेअर सबमरीन बनाने में सक्षम है, और INS अरिघत और अग्नि 5 इसके सबसे बड़े उदहारण भी है, तो इसी बिच हमारे एक्सपर्ट्स ने इस बात पर जोर देते हुए कहा की देश की समुद्री सरहदों को हर तरह से सुरक्षित बनाने के लिए एक नेवी के पास कम से कम एक तो नुक्लेअर पॉवेरेड कार्रिएर होना जरुरी है.

दरअसल उनके ये मानना है की भारत के पास परमाणु क्षमता वाला कार्रिएर बनाने की पूरी काबिलियत है, यहा तक बाबा एटॉमिक रिसर्च सेंटर जिसने INS अरिघत के लिए 50 मेगावोट का नुक्लेअर रिएक्टर बना दिया, वो एक बड़े कार्रिएर का नुक्लेअर रिएक्टर बनाने की भी क्षमता रखता है, आज भारत के पास वर्ल्ड क्लास मिसाइल्स, फाइटर जेट्स, सबमरीन और वॉरशीप्स बनाने की काबिलियत है, तो हम एक नुक्लेअर पॉवेरेड कार्रिएर क्यों नहीं बना सकते, हा हम बना सकते है, हमारे इंजिनियर इसके लिए तैयार भी है, पर हमारे लीडर्स इसमें हिचकिचाहट करते दिख रहे है.

बाबा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के इंजिनियरर्स और साइंटिस्ट का ये मानना है, की सरकार हमें ऐसा जहाज बनाने की परमिशन देती है, तो हम डीजल पर चलने वाले INS विक्रांत के मुकाबले 10 गुना अधिक ताकतवर परमाणु ऊर्जा पर चलने वाला जहाज बना देंगे वो भी स्वदेशी तकनीक के साथ, बस सरकार की हरी झंडी होनी चाहिए, इसमें कोई शक नहीं की भारत के लिए कोई काम नामुनकिन है, अगर विदेशों ने हमें मदद देने से मना कर दी तो भारत ने खुदके दम पर वो खास हथियार बनाकर दिखाया और आगे भी बनाते रहेंगे, बस हमारे लीडर्स में वो जूनून होना चाहिए, और वैसे भी आज नहीं तो कल चीन को देखते हुए नेवी को INS विशाल की जरुरत तो पड़ेगी ही पड़ेगी, और ये बडे जहाज थोड़ी ही एक साल में बनते है, INS विक्रांत को ही बनाने में 8 साल वक्त लगा, तो उस समय यहाँ वहा देखने के बजाय, अभी से क्यों ना शुरुवात की जाये,

आप बताईये क्या हमारे पास भी नुक्लेअर पॉवेरेड कार्रिए होने चाहिए या फिर नहीं और चीन को देखते हुए कितनी संख्या में होने चाहिए, 1 2 या फिर 3, नीचे कंमेंट करके जरुन बताये. जय हिंद।

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