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अफगान के लिए भारत ने चीन को 20 देशों के सामने खदेडा India UNSC Power !

दोस्तों अफगान के लिए भारत ने चीन की इंटरनेशनल बेईज्जती करा दी है, जी हा दोस्तों भारत के हर काम में टांग अडाने वाले चीन को भारत ने 20 देशों के महासभा में धो डाला, ना सिर्फ उसे खरी खोटी सुनाई बल्कि दुनिया के सबसे बड़े मंच का प्रेसिडेंट होने के नाते एक चेतावनी भी दी, की चीन कम से कम मानवता और आतंकवाद के बिच का फर्क तो समझे, हम सभी को पता है की जब से भारत UN का अध्यक्ष बना है, तबसे चीन भारत के हर प्रस्ताव को लेकर टांग अडाता रहा, भारत की अफगान में भूमिका को लेकर भी चीन हमेशा दोहरे मापदंड अपनाता रहा, जबकि वो तालिबान की नयी सरकार का खुलकर समर्थ कर रहा है, आपको बता दे की अफगान में बंदूक की नोक पर सत्ता हासिल करने के लिए जब सारी दुनिया तालिबान की आलोचना कर रही है, उसी समय चीन उसके साथ दोस्ताना संबंधों की नींव रखता दिखाई पडा.

अपने ताजा बयान में चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की, कि तालिबान पर दबाव डालने की बजाय हमें तालिबान के साथ सत्ता हस्तांतरण के दौरान उसे गाइड करने में मदद करनी चाहिए, चीन ही नहीं तो रूस भी तालिबान को लेकर कही ना कही नर्म पड़ता दिखाई दिखा, लेकिन भारत अफगान को लेकर काफी प्रतिबद्ध है, और वो अपने मित्र अफगान की सुरक्षा के लिए अमेरिका से लेकर नोर्देन अलायंस के भी संपर्क में है, लेकिन जो ये चीन भारत के हर काम में रोडा बनके खड़ा हो जाता है, उसे भारत के विदेश विभाग ने ऐसा धोया की चीन उस मीटिंग में भारत को एक शब्द भी नहीं केह सका, दरअसल न्यूज़ ट्री की और से ये Exclusive खबर बताई गयी की तालिबान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की राह में चीन की तरफ से अड़ंगा लगाने को लेकर, विदेश मंत्री एस जयशंकरजी ने उसे आईना दिखाते हुए कहा कि तालिबान को आतंकवादी घोषित करने के प्रस्तावों में, बिना किसी उचित कारण के चीन को बाधाएं नहीं खड़ी करनी चाहिए,

भारत ने चेताया कि तालिबान को लेकर कोई भी दोहरा मापदंड सिर्फ हमें तकलीफ ही पहुंचाएगा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से चीन को चेतावनी देते हुए कहा, की अंतरराष्ट्रीय समुदाय समान विचार रखता है, और तालिबान ने अफगान को लेकर जो किया उसकी सभी करतूतों की निंदा तो होनी ही चाहिए, फिर चाहे उसके पीछे मंशा कुछ भी हो, जयशंकर साहब ने चीन को समझाते हुए कहा, की तालिबान आने वाला वो खतरा है जो मिडल east में बसी शांति और सुरक्षा को पूरी तरेह से तहेस नहेस कर देगा, इसीलिए उससे कोई दोहरा मापदंड ना अपनाएं, तालिबान खूंखार तालिबान ही रहेगा, उसमें फर्क कर हम सिर्फ अपनी तकलीफें बढ़ाएंगे, तो बिना वजेह हमारे काम में अड़चन पैदा ना करे, यही सबके लिए सही रहेगा, भारत के इतना समझाने के बाद चीन के प्रतिनिधि के और से एक शब्द भी रिप्लाई की तौरपर सुनने को नहीं मिला और सबसे खास सुरक्षा परिषद दुसरे सदस्य देश भी भारत की इन बातों से सेहमत है, तो यहाँ चीन की ओफिसिअल बेईज्जती तो हुई ही, साथ ही तालिबान को लेकर भारत ने अपना रुख भी साफ़ कर दिया है, तो जयशंकर जी के इस विदेशनीति पर क्या भी सेहमत है, निचे एक कोमेंट जरुर करे.

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