HomeIndian Airforceअब भारत करेगा सीक्रेट Missile Test !!!

अब भारत करेगा सीक्रेट Missile Test !!!

दोस्तों DRDO ने एक बार फिर चीन को चौकाने वाला काम कर दिया है, जी हा दोस्तों इसबार DRDO ने जो मिलिट्री एसेट बनाया, वो तो चीन के पास भी नही, INS ध्रुव के लांच हो जाने के बाद चीन की सबसे शक्तिशाली यानी 12000km की रेंज वाली DF-41 ICBM मिसाइल भी भारत का कुछ नही बिगाड़ पायेगी, चीन के स्पाई सैटलाईट्स तक भारत की जासूसी नही कर पायेंगे, चीन पेहली इन बातों से परेशान था, की चीन को ओर परेशान करने वाली खबर DRDO की ओर से सुनने को मिली, वैसे इसबार भी DRDO एक जहाज का निर्माण कर रहा है, लेकिन वो किसी पैसेंजर यात्रा के लिए नही तो DRDO की घातक से घातक मिसाइल्स के परीक्षणों के लिए है.

जी हा दोस्तों आप ने सही सुना DRDO इसबार एक ऐसे जहाज को लॉन्च करने जा रहा है, जिससे कि मदद से भारत गहरे समंदर में मिसाइल्स परीक्षण कर सकेगा, दरअसल में यहा बात कर रहा हु, India’s First Floating Missile Test Ship INS अन्वेश की, जैसे कि आप स्क्रीन पे देख रहे होंगे कि हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी ऑफिसियल वेबसाइट पर इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है, की इसी महीने के भीतर भारत का पेहला तैरता मिसाइल परीक्षण सेंटर यानी INS अन्वेश हिन्द महासागर में लांच किया जाएगा, जिसे खासतौर पर सभी तरेह की मिसाइल टेस्ट के लिए डिज़ाइन किया गया है, ओर सबसे खास इस तरेह का जहाज अभी तक चीन के पास भी मौजूद नही, आज की तारीख सिर्फ अमेरिका और रशियन नेवी ही इस तरेह की शिप्स का इस्तेमाल अपने मिसाइल परीक्षणों के लिए करती है.

बताया जा रहा है, की इस जहाज की मदद से भारत हिंद महासागर में1500km अंदर तक अपनी मिसाइल्स टेस्ट फायर कर सकेगा, बिना किसी आबादी वाले इलाके को सूचित किये या फिर समुद्री ट्रैफिक को रोके बिना, अब से पहले होता क्या था, की DRDO को जब कभी भी कोई नई मिसाइल का परीक्षण करना हो, तो उसे सबसे पहले एक नोटम जारी करना पडता है, ताकि टेस्ट के दौरान ओडिशा के समुद्री तट पर कोई भी पसेंजर विमान उड़ान ना भरे, इससे दुश्मन को भी इस बात की भनक लग जाती थी, DRDO की कोई मिसाइल टेस्ट करने वाला है, जो कि सुरक्षा के लिहाज से बिलकुल भी सही नही, पर INS अन्वेश के आ जाने से भारत गहरे समंदर में किसी को पता चले बिना ही घातक से घातक मिसाइल का परीक्षण कर सकेगा.

इस जहाज को बनाने के लिए भारत ने करीब 450 करोड़ रुपये खर्च किये, इस तरेह का जहाज बनना सचमे काफी जटिल काम है, क्योंकि मिसाइल को लॉन्च करने के बाद उसकी लाइव टेलीमेट्री रीडिंग्स सेकड़ो मिलो दूर नेवी हेडक्वॉर्टर को देना आसान काम नही इसीलिए तो चीन के पास इतनी टेक्नोलॉजी होने के बावजूद उसके पास इस तरेह के जहाज नही, DRDO के इस ship की बदौलत किसी को खबर लगे बिना, गहरे समंदर में बैलिस्टिक मिसाइल से लेकर टैक्टिकल मिसाइल्स फायर करना आसान हो चुका है.

तो DRDO के INS अन्वेश के लिए एक जय हिंद जरूर लिखे.

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