HomeIndian Airforceभारत ने मंगवाये 100 ब्लैक शार्क पुरी चायनीज नेवी निशाने पे-चीन

भारत ने मंगवाये 100 ब्लैक शार्क पुरी चायनीज नेवी निशाने पे-चीन

दोस्तों वेस्टर्न फ्रंट के मोर्चे को देखते हुए भारत ना सिर्फ अपनी एयरफोर्स ओर आर्मी को मजबूत बनाने पे फोकस कर रहा है, बल्कि नेवी की भी हर जरूरत पूरी होती दिख रही है, हम सभी को पता है कि किसी भी देश की नेवी उस देश का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा यानी बैक बोर्न मानी जाती है, ओर आपको याद होगा की जब विंग कमांडर अभिनंदनजी को पाकिस्तान ने हिरासत में लिया था, तब इसी नेवी के डर से इमरान को उँन्हे सही सलामत भारत वापिस भी भेजना पड़ा था, नही भेजते तो इंडियन नेवी ने पाक ब्रिगेड हेडक्वार्टर उड़ाने के लिए ब्रह्मोस तैयार कर रखी थी, अब इसी नोसेना को चीन के खिलाफ ओर सशक्त बनाने के लिए भारत सरकार एक बेहद ही घातक हथियार नेवी के लिये खरीदने जा रही है.

दरअसल इंडियन डिफेंस न्यूज़ के मुताबिक भारतीय नेवी लंबे समय से अपनी Subamrines के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाले हेवी वेट टोपिडोज की मांग कर रही थी, जो कम से कम 60km तक वार कर सके, बताया जा रहा है कि 2013 14 में जो अगस्ता घोटाला सामने आया था, तब UPA सरकार ने इटालियन फर्म यानी लियोनार्डो के साथ किसी भी प्रकार की डील करने पर प्रतिबंध लगा दिया था, इस घोटाले में 3600 करोड़ के VVIP हेलिकॉप्टर्स समेत नेवी के लिए 100 ब्लैक शार्क हेवी वेट टोपिडोस भी खरीदे जाने थे, पर उस समय इस डील में घुस लेने के चक्कर मे योरोपियन एजेंसियों ने व्यक्तियों को पकड़ा था, तब मजबूरन भारत ने इटली की डिफेंस कंपनी लियोनार्डो पर सेंक्शयन्स ठोक दिए और नेवी की वो डील भी अटकी पड़ी,

पर अब कहा जा रहा है कि PM मोदी हाल ही में G20 सम्मेलन में हिस्सा लेने Rom गए थे तब वहा इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्रागी के अनुरोध पर भारत ने ये प्रतिबंध वापिस लेने का फैसला लिया, अब नेवी की जो 100 टोपिडोस कि डील अटकी पड़ी थी, उसे भी फिर से चालू करने की तैयारियां शुरू हो चुकी है, बता दे कि इटली में बने ये ब्लैक शार्क टोपिडोस दुनिया के टॉप 10 हेवी वेट टोपिडोस में शामिल है इनकी मारक क्षमता सटीक है जबकि ये 50 से 70km तक प्रहार करने में सक्षम बताए गए ये तकरीबन 90km/h रफ्तार से ट्रैवेल करते है ये टोपिडोस चीन के लिए सचमे सिरदर्द है, क्योकि इनमें लगे वॉरहेड के धमाके से बड़े से बड़े एयरक्राफ्ट काररिर को तक डुबोया जा सकता है, इसीलिए तो सरकारने 8 साल बाद फिर से इन्हें खरीदने का फैसला किया,

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