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भारत-USA में हुयी ऐतिहासिक डील भारत के खातिर वाइट हाउस के रुल्स तोडे

दोस्तों आखिर चीन को जिस बात का डर था वही कदम भारत अमेरिका उठा चूका है, हो सकता है भारत की अमेरिका के साथ हो रही इस डील को लेकर रूस थोडा नाराज हो, लेकिन इस डील से इंडियन एयर फाॅर्स की ताकत में कई गुना इजाफा होने वाला है, जी हा दोस्तों बड़े लम्बे समय से हो रही मांग को अब जाकर पूरी की गयी, इससे पहले अपने सुना होगा की भारत अमेरिका संयुक्त रूप से AL-UAV यानी Air Launch Unmanned Aerial Vehicles बनाने को सहमत हो चुके थे, जिसके तहेत भारत की DRDO और अमेरिका की एयर फोर्स रिसच लेबोरेटरी ऐसे UAV’s का निर्माण करेंगी, जो दुश्मन ठिकानो की जासूसी करने के अलावा छोटे मोटे बम धमाके करने में भी सक्षम होंगे.

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, २० साल पुराने अपने रक्षा संबंधो को मजबूत बनाते हुए, कल भारत अमेरिका ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए, जी हा दोस्तों चीन को पटखनी देने भारत अमेरिका अब मिलकर ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम करेंगे, हम सभी जानते है की इस समय दुनिया में सबसे घातक ड्रोन अगर कोई ऑपरेट करता है तो है US Airforce फिर चाहे MQ-9 रीपर, एवेंजर हो या फिर प्रिडेटर मरीन हो ड्रोन टेक्नोलॉजी में अमेरिका का हाथ कोई नहीं थाम सकता, आपको बता दे की अभी १ हफ्ते पहले ही अमरिकी डिफेन्स कंपनी DARFA की और से बनाये X-31 स्माल UAV’s US Airforce के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट यानी C-130J लांच किये गए जिन्हें ना सिर्फ बिच हवा में लांच कर टेस्ट किये गए बल्कि काम होने के बाद उन्हें फिर से रिट्रीव भी किये गए.

अब सेम इसी कांसेप्ट के आधार पर भारत और अमेरिका अपने Futuristiks मिनी UAV’s का निर्माण करेंगे, जिन्हें भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर या C-130J Super Hercules जिसे मालवाहक विमानों से लांच किये जा सकेंगे वैसे ये पहली बार होगा जब अमेरिका ऐसी क्रूशियल तकनीक किसी बाहरी देश के साथ साझा कर रह हो क्योकि इतनी एडवांस तकनीक अभी तक नाटो के सदस्य देशों को तक नहीं दी गयी, जबकि भारत अमेरिका के ना कहने के बावजूद रशियन S400 खरीद रहा है, फिर भी अमेरिका हमें ये तकनीक देने को राजी हुआ पहले तो वाइट हाउस इसे देने से इंकार कर रहा था लेकिन जबसे मोदी G20 सम्मेलन में बायडेण से मुलाकात कर आये तो उसके २ दिन के भीतर ही ये डील फाइनलाईज कर दी गयी, वैसे मानना पड़ेगा भारत की विदेश निति को जय हिन्द!

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