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रशिया से 7000 करोड़ की डील रद्द पुतिन हैरान भारत का भरोसा उठ चूका

दोस्तों ये केहना गलत नहीं होगा की इन दिनों जितने झटके भारत की ओर से चीन पाक को दिए जा रहे, उतने ही तगड़े झटके रूस भी खा रहा है, जी हा दोस्तों एक समय था जब हथियारों से लेकर राकेट ऐन्जिंस के लिए भारत को दुसरे देशों के आगे हाथ फ़ैलाने पड़े, इसमें कोई शक नहीं की समय आने पर रूस हमेशा भारत के साथ खड़ा, कश्मीर मुद्दा हो या आतंकवाद भारत के हर प्रस्ताव को रूस का समर्थन रहा है, लेकिन रुसी हथियारों को लेकर जो स्ट्रेटेजी भारत ने चीन खिलाफ बनायी थी, वहा मात्र रूस कही न कही फेल रहा है, अब ये आपको बताने की जरुरत नहीं की भारत किसे मद्देनजर रखते हुए अपने हथियारों की संख्या बड़ा रहा, या फिर वक्त आने पर किस देश के खिलाफ इन्हें इस्तेमाल किये जायेंगे, जाहिर सी बात है चीन यही एक ऐसा देश है जो ना चाहते हुए भी भारत को युद्ध के लिए उकसा रहा, और इन दिनों हमारी सेना जितने भी हथियार खरीद रही है या बना रही है वो सिर्फ चीन को हराने के लिए बनाये जा रहे है.

यही सोच लेके बीते 70 सालों से हम रशिया से हथियार खरीदते रहे फिर चाहे फाइटर जेट्स हो या चोपर्स हमने सब ख़रीदा, यही सोचकर की इनकी बदलौत हम चीनियों पे बढ़त हासिल करेंगे, वक्त आने पर चीन को माकूल जवाब देंगे, लेकिन रूस ने यहाँ दिमाग क्या लगाया की जो हथियार भारत को बेचे सेम वही हथियार चीन को भी सप्लाई किये, जैसे की एयरफोर्स के पास सुखोई विमान है, तो चीन के पास भी सुखोई SU35 जेट्स मौजूद है, नेवी के पास मिग 29 तो चीनी नौसेना के पास भी मिग 29 भारत ने हाल ही S400 ख़रीदा तो चीन के पास भी ये पहले से मौजूद है, मतलब आप ही बताईये भारत के सभी फ्रंट लाइन वेपन्स जो रशिया से खारिदे गए है, क्या वो चीन के पास नहीं है, बिलकुल है, बल्कि भारत से दगुनी संख्या में है, तो ऐसे में क्या चांसेस है की रुसी वेपन लेकर चीन को हराएंगे अगर ब्रह्मोस भी भारत में बनायीं नहीं जाती तो रूस इसे भी चीन को बेच चूका होता, फिर तो हमारे पास ऐसा कोई हथियार ही रेहता की जिससे चीन को डराया जा सके थोड़े बहोत जो अमेरिकी हथियार है वही चीन के खिलाफ इस्तेमाल करने पड़ते.

इसीलिए तो S400 के बाद भारतने रशिया कोई भी बड़ा हथियार नहीं ख़रीदा, क्योकि रुसी हथियारों के दमपर हम कभी भी चीन पर बढ़त हासिल नहीं कर सकते, AK203 की बात करे तो उसे भी भारत में बनायीं जा रही है, ताकि इसकी तकनीक चीनियो के हाथ ना लगे, और यही वजेह के हाल ही के दिनों में लगातार रूसी वेप्नस की डीअल्स cancel हो रही है.

आपने देखा ही होगा की अभी दो दिन पहले ही कबिनेट की और से करीब २२० रुसी कमोव हेलिकॉप्टर और 5000 इगला मिसाइल्स की डील रद्द करने की बात कही गयी थी, जिनकी अनुमानित कीमत करीब बिलियन डॉलर में थी, और आज जो डिफेंस न्यूज़ की और से खबर सुनने को मिली वो तो इससे भी मेहंगी थी, इस आर्टिकल के मुताबिक डिफेंस मिनिट्री ने 21 मिग 29 की खरीद को रद्द करने का फैसला कर लिया है और इसे एयरफोर्स की भी हां है, दरअसल जून 2021 में रसिया की तरफ से कहा गया था, की वो भारत नए से मॉडिफाइड किये गए मिग 29 सप्लाई करेगा जिनकी अनुमित कीमत 7000 करोड़ बताई जा रही थी, देखा जाये तो रसिया सिर्फ मॉडिफाइड करने के लिए 7000 हजार करोड की मांग कर रहा था, जबकि इतने पैसो 10 या उससे भी ज्यादा तेजस मार्क २ आराम से बनाये जा सकते है, खबर के मुताबिक हद से ज्यादा क्रेश्लान्डिंग और maintenance को देखते हुए एयरफोर्स रुसी विमानों को बाहर निकालने की सोच रही, इसीलिए तो अब कोई जेट या हेलीकाप्टर यहाँ तक की मिसाइल्स भी रशिया से खरीदी नहीं जा रही.

हो सकता है रूस भारत के इस कदम से नाराज हो, या फिर रूस चीन को ज्यादा महत्व देने लगे लेकिन आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत को कुछ तो कदम उठाने पड़ेंगे, वैसे भी तो हम 70 सालों से रशिया से हथियार खरीद रहे है, असे में आप ही बताईये, क्या हमें रशिया अमेरिका से ही हथियार खरीदने चहिये या फिर अपनी और से भी कुछ प्रयास करने चाहए निचे कमेंट करके जरुर बतायेगा.

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