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रूस को रोको इस्कंदर मिसाइले निकाली युक्रेन बचाव करने भारत की शरण में

परमाणु युद्ध की धमकियां दी रहे, छोटी से बात को लहर शुरू हुई ये बहस आज लाखो सैनिकों के जानपर बन आयी आपको भी पता है कि सवा 4 करोड़ की आबादी वाले यूक्रेन पे कई दशकों तक रूस राज करता रहा, लेकिन जैसे सोवियत विघटन के बाद कई देश रूस के चंगुल से बाहर निकल गए वैसे ही यूक्रेन भी  निकलना चाहता है, यूक्रेनी राष्ट्रपति का केहना कि वो नाटो जॉइंट करना चाहते है लेकिन रूसी राष्ट्रपति इसकी इजाजत नही देते, पुतिन का मानना है कि नाटो हमारे अंदुरिणी मामले में दखलंदाजी कर यहा के देशों को रूस के खिलाफ कर रहा है, पुतिन को डर है की कही यूक्रेन भी अमेरिका के सैन्य संगठन नाटो का सदस्य बन गया तो नाटो को रूस के सीमाओं तक पहोचने में वक्त नही लगेगा, आपको बता दु कि एस्तोनिया, लाटविया ओर लिथुआनिया जैसे कई रूस के पड़ोसी नाटो के सदस्य देश बन चुके है ऐसे में यूक्रेन ओर जॉर्जिया जैसे देशों को रूस अपने हाथ से जाने नही देना चाहता, ओर यही कारण है कि यूक्रेन को धमकाने हजारों की तादात में टैंक लाखों की तादात में सैनिक ओर कई सारा असला बारूद तैनात करने के बाद अब रूस की तरफ से परम बैलिस्टिक मिसाइल्स भी यूक्रेनी सिमा पर लायी जा रही है, रूस यूक्रेन को रोकने विषाद तक पागल हो गया कि उसने रेल गाड़िया भर भर के अपनी इस्कंदर M परमाणु मिसाइल्स को भी बड़े पैमाने पर तैनात करनी शुरू कर दी है, वीडियो में भी देखा जा सकता है कि रेल गाड़ियों पर बड़े पैमाने पर हथियार ट्रांसपोर्ट किये जा रहे, यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय का ने दावा किया कि8 रूस ने कम से कम 35 इस्कंदर लॉन्चर्स को यूक्रेनी सिमा पर तैनात कर दिए है जिसने निशाने यूक्रेन की राजधानी कीव के अलावा कई महत्वपूर्ण शेहर आते है, रूस की इस हरकत पे पूरा नाटो संघठन पुतिन पे गुस्सा है और रूसी हथियारों को वापिस ले जाने के लिए कह रहे, लेकिन रूस मनाने को तैयार नही, ऐसे खबरे सुनने को मिली है की यूक्रेन ने भारत से भी मदद मांगी की वो रूस को कुछ समझाए, अब आप बोलोगे की यहा भारत क्यो घसीटा जा रहा रूस यूक्रेन विवाद में भारत का दूर तक कोई लेना देना नही फिर भारत क्या करेगा, सही कहा रूस और यूक्रेन ये अपना अंदुरिणी विवाद है, लेकिन दोस्त होने के नाते एक डिफेंस पार्टनर होने के नाते एक व्यापक साझेड्सर होने के नाते यूक्रेन ने भारत की मदद मांगी, आपको समझ नही आ रहे तो भारतीय विदेश मंत्रालय की इस रिपोर्ट को पढिये, जिसमे दोनों दिनों ने बिलियन डॉलर्स में अपने व्यापारिक ओर रक्षा संबधों को स्थापित करने की बात कही थी, भारत और यूक्रेन 2012 से परमाणु ऊर्जा, बैंकिंग, ट्रेड, फार्मा, कृषि, शिक्षा और स्पेस संबंधी कार्यक्रमों में मिलकर काम कर रहे है.

ओर आपको भी पता है भारत जब कभी भी किसी के साथ अपने द्विपक्षीय संबंध स्थापित करता है, तो उसे निभाने आगे भी आता हूं पर यहा गौरकरने वाले बात ये है कि इस मैदानी जंग में यूक्रेन से लेकर अमेरिका तक सब भारत के मित्र है ऐसे एक का साथ दिया तो दूसरा नाराज हो जाएगा, चुप बैठे तो मदद से मुकरने वाली बात होगी इसिलए ऐसे  द्विविधा भरी परिस्थितियों में भारत को फूक फूककर कदम रखने की जरूरत है, आपको क्या लगता है इस समेय भारत ने न्यूट्रल रेहना सही होगा या फिर रूस अमेरिका इसी एक साथ देना चाहिए नीचे कमेंट करके जरुर बतायेगा.

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