HomeIndian Airforce1 राफेल में दो FA-18 अमेरिका ने फ्रांस के होश उड़ाये

1 राफेल में दो FA-18 अमेरिका ने फ्रांस के होश उड़ाये

सोचा नही था कि भारत के एक टेंडर को हासिल करने के लिये अमेरिका इतना जोर लगा देगा, कल तक को सिर्फ FA18 का लेटेस्ट वर्शन ओर किमत को लेकर बाते हो रही थी, लेकिन अब जो अमेरिकी सरकार कदम उठाने जा रही है, उसे देखने के बाद तो ऐसा लग रहा है कि अमेरिका ना सिर्फ भारतीय नोसेना का 57 जेट्स का नेवल कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के फिराक में है बल्कि एयरफोर्स का 114 लड़ाकू विमान का MMRCA टेंडर भी अपने नाम करना चाहता है, तभी तो पेंटागन में इतना बड़ा बिल पास किया गया है, दरअसल ये बात आप भी जानते है कि फ्रांस का राफेल काररीर डेक बेस परीक्षणों में अमेरिकी FA18 को काटे की टक्कर दे रहा है, प्लस फ्रांस की सरकार ने जो ऑफर्स भारत के सामने रखी, उसने अमेरिका की टेंशन ओर भी बढ़ा दी है, देखा जाए तो अमेरिका कभी अपने हथियार अन्य किसी देश के साथ संयुक्त रूप से बनाने से बचता आ रहा है,

वो भले दुसरो देशों में अपने हथियारों के प्लांट लगायेगा लेकिन वहां सिर्फ उनकी असेंबली होगी, नाकि तकनीकी हस्तांतरण के बाद की जाने वाली मैन्यूफैक्चरिंग, यही कारण है कि जापान में बीते कई सालों से F35 का निर्माण हो रहा है, पर अभी तक जापान को F35 मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नही मिला, लेकिन भारत अपनी जिद पर कायम है, भारत ने पेहले ही केह रखा है जो देश हमारे साथ हमारी जमीन पर अपने फाइटर प्लेन्स का निर्माण करने की तैयारी रखता है हम भी उसी के साथ आगे बढ़ना चाहेंगे, देखा जाए तो अमेरिका इतनी आसानी से अपनी तकनीक हमसे साझा नही करेगा, इसीलिये उसने ओर एक लुभाने वाली ऑफर भारत के लिए तैयार कर रखी है,

ईस रिपोर्ट को दिखिये, जिंसमे लिखा है कि पेंटागन के पास नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट यानी NDAA की ओर से एक बिल पास किया है, जिंसमे लिखा है, की जैसे अमेरिका ने अपने दूसरे सहयोगी देशों को अपने टॉप नौच वेपन्स यानी कि थाड, पेट्रियट, नासमस, अब्राम्स टैंक ओर F35 जेट्स मुहैया कराए है, अब समय आ चुका है कि यही हथियार भारत के लिए भी खोले जाये, आपको बता दु की नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट अमेरिकी सेना का वो कानून जिसके तहत लिए फैसलों पर खुद वाइट हाउस गौर करता है, ओर आज यही कानून भारत की ओर रुख कर रहा है, इतना ही नही अमेरिकी रक्षा विभाग की आर्म सर्विस कमिटी ने ये तक केह दिया, की चीन के खिलाफ लड़े जा रहे इस मौर्चे मे भारत की हवाई ताकत और भी बेहतर बनाने के लिए हमे भारत को FA18 के साथ साथ F35 भी ऑफर करना चाहिए, ताकि भारत चीनी आक्रमण से अपने आपको बचा सके,

देखा जाए तो इस समय अमेरिकी सरकार के अलावा अमेरिकी ऐजेंसी, अमरीकी कंपनीया यहा तक कि वहां के सीनेट भी भारत कें पक्ष है, वे चाहते है कि भारत अमेरिका मिलकर काम करे, जैसे आज भारत रूस कर रहे है.

लेकिन बाइडेन प्रशासन भारत के साथ कोई भी तकनीक साझा नही करना चाहती, दिखिये समझने वाली बात है कि अगर सीनेट के दबाव में आकर बाइडेन ने भारत के लिये F35 ऑफर भी किया तो क्या वो F35 को भारत में बनाने की इजाजत देंगे, क्या आपको लगता है कि जैसे HAL रूस के सुखोई जेट्स देश मे बनाता है, उँन्हे DRDO की मदद से अपग्रेड कर रहा है क्या वैसे ही अमेरिका अपने F35 हमे भारत मे बनाने देगा, बेशक भारत के लड़ाकू विमनो का कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए अमेरिका F35 भी मैदान में उतरेगा, पर क्या उसकी तकनीक या फिर उसे मेक इन इंडिया के तहेत बनाने के लिए अमेरिका राजी होगा वैसे भी हमे अगर F35 ही खरीदना था तो हम AMCA प्रोजेक्ट ही शुरू नही करते.

खैर आप बताईये हमे फ्रांस की तकनीक चाहिए या अमेरिकी F35 नीचे कमेंट करके जरुर बतायेगा.

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